बुधवार, जुलाई 13, 2005

बाग़वान फ़िल्म के बारे में

बाग़वान एक बहुत अच्छी फ़िल्म है रिश्तेदार के बारे में। इस फ़ल्म में एक बड़ा परिवार है, और इस परिवार का नाम मलहोत्रा है। मलहोत्रा परिवार में माता-पिता, चार बेटे, और एक दत्तक हैं। तीन बेटे शादी-शुदा हैं, और दत्तक की शादी होनेवाली है। माता का नाम पूजा है, और पिताजी का नाम है रा़ज। पूजा और राज के एक पोता राहुल है और एक पोती पायल हैं। पूजा और राज चालीस साल तक शादी-शुदा हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने एक दूसरे को बहुत चाहते हैं। उनका प्यार उतने साल के बाद कितना मज़बूत होता है। फ़िल्म के पहले घंटे में इस बात बहुत पारदर्शक से दिखाई देती है।

हालाँकि पहले पूजा और राज के परिवार में सब ठीक चल रहा है, फिर भी पहले घंटे के बाद चार बेटे पूजा और राज के विरूद्ध हो जाते हैं। राज बैंक के काम से रिटायर होते है, और चार बेटे और अपके परिवार सिर्फ़ राज के पैसे के बारे में सोच रहे हैं। असल बात है कि राज और पूजा अपके बच्चों से रहने चाहते हैं। बच्चे आधोनिक जीवन से बिगाड़ जाते हैं। उनके माता-पिता का देख-भाल करने नहीं चाहते हैं। होली के समय राज और पूजा तय करते हैं कि दोनों बच्चे के साथ रहनेवाले हैं, और किस के साथ रहें अपके बच्चों के मरज़ी होगी। बच्चों ने सोचे कि अगर माता-पिता को अलग रहना पड़ेगा, तो उनहोंने बच्चों के साथ रहने नहीं चाहते हैं। तो बच्चों का फैसला है कि माँ एक बेटे के साथ रहेंगी, और पिताजी दूसरे बेटे के साथ रहेंगे। पूजा और राज को इस भाव अच्चा नहीं लगता है, लेकिन फिर भी उनहोंने अपने बच्चों की बात मानते हैं।

अलग रहने हुए माता-पिता को कितना दु:ख लगा! चालिस साल के बाद इस तरह से विभाजन बहुत मुश्किल है। वच्चे पूजा और राज से बहुत खराब तरह की बात करते हैं, लेकिल आंत में पूजा और राज के पोती और पोते के साथ अच्छा रिश्त बन जाता है। जब माँ-बाप दूसरे बच्चों के साथ रहने का समय आता है, तब पूजा और राज फिर मिलते हैं। उन्हें दत्तक (आलोक) मिलता है, और आलोक उन्हें बहुत ध्यान से देख-भाल करता है। राज परिवार के अनुभव के बारे में एक उपन्यास लिखता है, और यह उपन्यास बैस्ट सैलर हो जाता है। इसलिए एक बैंक्वेट है, और इस बैंक्वेट में राज अपने चार बेटे को बताते है कि वे कभी नहीं उन्हें माफ़ कर सकते हैं। जो पैसे राज अपने उपन्यास से मिले, उनसे वे और पूजा घर लौट जाते हैं।