Why doesn't my wireless card work?
अपनी दोस्त के परिवार से मिलते हुए मुझसे कोई गलती हो गयी थी। उस ने मुझे कहा कि मुझे पाँच बजे आना चाहिये। गड़ी से मेरे घर से उस का घर तक तकरीबन पच्चास मिनट है तो सारे चार बजे को मैं तैयार था। लेकिन दरअसल कितनी दुर नहीं था और मैं ने उस का घर पोने पाँच बजे पहुचा। पाँच मिनट के लिये मैं ने गड़ी में पाँच बजे का इनतज़ार किया लेकिन इनतज़ार से ऊब गया तो मैं गड़ी निकल जाकर दरवाज़ा की घंती बजा दिया। लेकिन उस के परिवारवाले मेरे लिये बिलकुल तैयार नहीं थे। उस की माँ का खाना पका नहीं गया, उससे और उस की बहन से हिजाब नहीं पहन गये, आदि। कुछ समय के बाद उस ने मुझे बताया कि उस के परिवारवाले के लिये पाँच बजे यानी करीब सारे पाँच या छ: बजे। उस का घर इन्दिन स्तंडर्ड टइम में चल रहा है।
पिंजर की कहानी बहुत जटिल है। वह विभाजन के बारे में है लेकिन वह भी औरतों के समस्ये के बारे में है। शुरु में, रशीद के द्वारा पुरो का अपहरण कर जाती है। रशीद उस को अपने गाँव को लेता है जहां पुरो रशीद की बीवी बनती है। लेकिन क्या करे? इज़्ज़त लूटती हुई औरत, इस समाज में, अपने परिवार को वापस नहीं पाती थीं। रशीद कितना अच्छा आदमी है लेकिन ज़िन्दगी भी पुरो के लिये आसान नहीं है। पहले उस को गर्भपात होता है और फिर उस का गोद लिया हुआ बेटा उस से ज़बरदस्ती छीन ली जाती है। यह तो इस की फ़िल्म का संदेश है मेरी राय में। उस ज़माने में, उस समाज में औरतों की ज़िन्दगी बहुत मुशकिल, बहुत अयोग्य थी खासकर विभाजन के दौरन। यह फ़िल्म हमें धर्म और समाज के बारे में सोचवाती है। इस तरह में बहुत महटव्पूर्ण फ़िल्म है।
सोचते सोचते मुझे कुछ नहीं अर्थ के अनार्थ के बारे में आ रहा है। तो शायिद मैं अराबिक और उस की रिशता हिन्दी के साथ के बारे में लिखूं क्योंकि हिन्दी सीखते हुए मुझसे कुछ ग़लतफ़मी हो गये। हिन्दी में बहुत अराबिकवाले शब्द हैं लेकिन कई शब्द बदला गये। मसलन: मसलन। उस का मतलब दोनों भाषनों में "for example" है लेकिन फ़ोनालोजी की वजह से "th" "स" बन गया। बहुत शब्दों में अराबिक से मुशकिल अवाज़ था। इस उर्दू के शब्द देखिये: बाज़। यह शब्द अराबिक से है लेकिन मात्र भाषन में बहुत फ़र्क़ है। अगर मैं अराबिक बोलूं और मैं इस शब्द का इस्तेमाल करूं तो मैं "बाआड" के जैसे बोलूं।
इसलिये मैं सोचता हूँ कि जब मैं ने हिन्दी सीखने शुरू किया मैं बहुत हिन्दी के शब्द जानता था लेकिन मुझे नहीं मालूम (एक और अराबिक शब्द...) था। इसलिये, मुझे बहुत संभ्रान्ति था। कुछ और मुख़तलिफ़ शब्द:
फ़र्ज़ (~फ़र्ड), दावत (~दआवा), वग़ैरह (~वा ग़ाइरु हु), इंतज़ाम (~इंतिthाम), लज़ीज़ (~ladhidh), आदि।
(th = as in this, that; further back in the mouth for "intitham")
(dh = dental fricative)
मेरी राय में यह थोड़ी सी परेशानी है लेकिन मैं भी जानता हूँ कि ज़बान इतनी दिलचस्प हैं इस की वजह से।

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